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Starlink 2021 में भारत में आ सकता हैं, Telecom Battel ?

नमस्कार तो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Space x के उपग्रह के जरिये इन्टरनेट कनेक्शन के बारे में बात करने जा रहे हैं अगर सरल भासा में कहें तो एलोन मस्क की Space X कम्पनी के एक प्रोजेक्ट स्टारलिंक (Starlink) के बारे में बात करेंगे। इसके बारे में सरकार का क्या विचार हैं और बहुत चीजों के बारे में जानते हैं।

स्टारलिंक स्पेस एक्स का एक सैटेलाइट इंटरनेट का प्रोजेक्ट है इस प्रोजेक्ट में स्पेस के द्वारा पृथ्वी के लोअर ऑर्बिट या कहें तो निचेले कक्षा में उपग्रह तारामंडल निर्माण कर रही हैंतारामंडल में हजारों छोटे उपग्रह हैं जो पृथ्वी के लोअर ऑर्बिट में हैं और बहुत मात्रा में हैं जो धरती में उपलब्ध ट्रांसिवर्स के साथ काम करंगे और इसके माध्यम से हम इन्टरनेट तक पहुँच सकते हैं ।

starlink constellation
Image Credit : Geekwire

स्पेसएक्स की योजना बहुत सारे क्षेत्र में उपयोग में लिया जा सकता हैं जैसे सेना से संचार बनाये रखने में, साइंटिफिक जरूरतों के लिए और दुर्गम इलाके जहाँ मोबाइल या ब्रॉडबैंड संचार संभव नहीं हो वहां इसका उपयोग किया जा सकता हैं

इस प्रोजेक्ट में स्पेस एक्स 2015 से काम कर रहा हैं। प्रोजेक्ट के सुरुआत में 2 टेस्ट उपग्रह लांच किये गए थे फ़रवरी 2018 में उसके और टेस्ट उपग्रह और 60 उपग्रह उपग्रह लांच किये गए मई 2019 में। इसके बाद 15 अक्टूबर 2019 को, संयुक्त राज्य अमेरिका के संघीय संचार आयोग (FCC) ने स्पेसएक्स की ओर से अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) को 30,000 अतिरिक्त Starlink उपग्रहों के लिए स्पेक्ट्रम उपयोग करने की अनुमति मांगी जिससे स्पेस एक्स के पहले से अनुमति लिए 1200 उपग्रहों को और प्रोत्सहन मिल सके।

Starlink Satelite
Image Credit : Spacenews
Starlink 1
Image Credit : Forest Katsch

स्पेस एक्स के द्वारा बनाये गए ये उपग्रह बहुत की छोटे आकार के हैं जिससे कम्पनी एक की लांच में बहुत सारे उपग्रह को पृथ्वी के कक्षा एक बारे ही में प्रवेश करा सके। उपग्रहों के छोटे होने के कारण ये लोच करने में बहुत आसानी होती हैं। ये उपग्रह भले ही छोटे है लेकिन ये सवाल अवस्य आता हैं की इससे पृथ्वी के कक्षा में बहुत कचरा  बढ़ जायेगा लेकिन ऐसा नहीं है स्पेस एक्स इसके लिए भी तैयार है।

स्पेस एक्स के द्वारा बनाये गए उपग्रह में एक इंजन है जिसका उपयोग वह तब कर सकता है जब उपग्रह उपयोगी नही हो किसी कारण से। ये उपग्रह इंजन चालू करके वापस से पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हो जाते हैं और वायुमंडल में घर्सन के कारन ये अपने आप को नष्ट कर लेते हैं

स्पेस एक्स  का इरादा पृथ्वी के अनछुए क्षेत्रों को उपग्रह इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करना है, साथ ही शहरी क्षेत्रों को प्रतिस्पर्धी मूल्य सेवा प्रदान करना है। कम्पनी का यह भी कहना है की स्टारलिंक प्रोजेक्ट से होने वाला मुनाफा उनके मंगल ग्रह के योजना में उपयोग किया जा सकेगा

स्पेस एक्स के स्टारलिंक प्रोजेक्ट के कुछ प्रतिस्पर्धी भी हैं जो ऐसे ही उपग्रह के माध्यम से इन्टरनेट कनेक्टिविटी प्रदान कर सकते हैं। ऐसा ही एक और तारामंडल हैं वनवेब जिसकी घोषणा लगभग लगभग स्पेस एक्स के स्टारलिंक प्रोजेक्ट के बाद ही किया गया था। ऐसा ही एक और तारामंडल का नाम सामने आया हैं जिसका नाम तेल्सेट हैं। अमेज़न ने भी हाल ही में ऐसे ही उपग्रह के जरिये इन्टरनेट प्रदान करने बात कही थी।

भारत में स्पेस एक्स स्टारलिंक की स्थिति :

स्पेस एक्स अमेरिका और कनाडा में वाणिज्यिक रूप से उपग्रह के माध्यम से इन्टरनेट प्रदान करना शुरु कर दिया हैं और ये सब करने में स्पेस एक्स का स्टारलिंक सफल भी रहा हैं। ऐसे में स्पेस एक्स ने भारत सरकार से उपग्रह ब्रॉडबैंड प्रौद्योगिकियों को अनुमति प्रदान करने का आग्रह किया हैं। स्टारलिंक का इसके पीछे यह उद्देश्यं हैं की ये भारत में पूर्ण रूप से उपग्रह के माध्यम से इन्टरनेट कनेक्टिविटी प्रदान कर सके।

स्पेस एक्स का नज़र भारत और चीन की विशाल उपयोगकर्ता के आधार को कैप्चर करना हैं। कंपनी ने कहा कि यह 2021 के अंत तक पूरे भारत में लगातार स्टारलिंक कवरेज के लिए तारामंडल को बनाने में धयान देगी।

ट्राई (TRAI) के परामर्श पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, सैटेलाइट सरकार के मामलों के लिए स्पेसएक्स के उपाध्यक्ष पेट्रीसिया कूपर ने कहा कि स्टार्टअप जैसी नई तकनीकों को अद्यतन नियमों, नीतियों पर विचार करने की आवश्यकता हो सकती है। उसने ये भी कहा की नए तकनीक को प्रोत्सहन देने के लिए उपग्रह के इस्तेमाल के लिए पहले से निर्धारित स्पेक्ट्रम के उपयोग की अनुमति प्रदान करें।

स्पेस एक्स ने ट्राई द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए यह भी कहा कि एडवांस सैटेलाइट टेक्नोलॉजी जैसे स्टारलिंक के उपयोग में बाधा या बाधा डालने वाली नीतियां मौजूदा ब्रॉडबैंड सेवाओं के अधिक मूल्य का कारण बन सकती हैं।कंपनी ने अतिरिक्त रूप से उल्लेख किया है कि मौजूदा वायर्ड इन्टरनेट कनेक्शन बुनियादी ढाँचे के खर्च” के साथ आते हैं इनकी लागत प्रति किलोमीटर वायर के अनुसार लगाती है इसलिए ये ज्यादा विस्तार नहीं कर पाई हैं।

स्पेस एक्स ने ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिए कई समान उपग्रह टर्मिनलों की अनुमति देने के लिए “Blanket Licensing” के लिए भी कहा और Ka-बैंड आवृत्तियों का उपयोग करने का आग्रह किया जो कि स्टारलिंक द्वारा उपयोग किया जाता है।

Starlink Antenna
Image Credit : Bussiness Insider

अगर भारत सरकार द्वारा स्पेस एक्स को अनुमति दी जाती है तो अवस्य ही भारत के दिग्गज टेलिकॉम ऑपरेटर्स के लिए चिंता का विषय बन सकता है क्योकि स्पसेक्स इनसे बहुत ज्यादा गति से इन्टरनेट प्रदान करता है जो की 50 से 150 Mbps तक होता है अगर इसकी तुलना भारत में उपलब्ध टेलिकॉम ओप्रटरओ से की जाये तो वर्त्तमान में बहुत ज्यादा है और ज्यादा भरोसेमंद भी हैं जहाँ टेलिकॉम ऑपरेटरओ की स्पीड की जगह अच्छी होती है और कई जगह इन्टरनेट ही नही चल पता।

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